
जहाँ एक ओर हमारे आस पास से गौरैया विलुप्त हो रही है देखने को नही मिलती ऐसी स्थिति मे अपना सारा समय सिर्फ विलुप्त प्राय हो रही गौरैया को देने वाली सुबह की पहली किरण व डूबते सूरज की आखरी किरण के साथ प्रयागराज मे अलोपीबाग की सीनियर सिटीजन शैल कुमारी श्रीवास्तव उम्र 70 वर्ष।
सुबह की पहली किरण के साथ गौरैया को दाना पानी देने के साथ साथ अपना सारा समय पर्यावरण की सेवा मे समर्पित कर दिया है, हर हफ्ते एक नया पौधा लगाती है, इनके यहाँ अनार के पेड पर सौ से ज्यादा गौरैया रहती है, जहाँ आज के समय मे लोग सुबह उठने के लिए अलार्म का उपयोग करते हैं वहीं पे शैलकुमारी जी का कहना है कि उनकी सुबह सुबह गौरैयों की चहचहाट से ही होती है। आज के समय ऐसे लोग बहुत कम ही हैं, जिन्होंने अपना समय पर्यावरण को दे दिया है।


